Posts

Showing posts from April, 2018

कली

एक आँगन के गुलशन में, उस घर के माली (मालिक) ने, चाहत के बीज लगाए, उस घर की फुलवारी में। बढ़ा पौधा चाहत का, कली हुई एक प्यारी, महका चमन खुश था माली, बहकी बहकी डाली। हर लम्हा करता रखवाली, बढ़ती कली फैली खुशहाली। कली खिली और फूल बनी, घर आँगन फिर छोड़ चली। जिस गुलशन में कली खिली, जिस माली ने सींची डाली। उस आँगन को छोड़ चली, महकाने दूजी फुलवारी। बस इतनी सी है कहानी, है वो किसी की निशानी। पर जीना है जिंदगानी, दुनिया की है रस्म निभानी। नीति

आँखें

Image
मेरी आँखें हैं आइना मेरे दिल का, देखकर समझ सकते हैं हाल हमारा। नहीं छुप पाता कुछ भी इन आँखों से, आँखों में है हर राज दिल हमारा। किसी से बात करके भर आती हैं आँखें, किसी की याद में बरस पड़ती हैं आँखें। जुबाँ जो ना बोले वो बोल पड़ती हैं आँखें, दर्द दिल में होता है तड़प जाती हैं आँखें। दरिया की रवानी सी बहती हैं आँखें, मतवाली, बेचैन रहती हैं आँखें। राहों में पलकें बिछाए ये आँखें, खामोश लब से बुलाती ये आँखें। हजारों ख्वाव सजाती हैं आँखें, कभी हँसाती कभी रुलाती हैं आँखें। हर दर्द कह देती हैं आँखें, मेरी आँखें हैं आइना मेरे दिल का ।। नीति

हैवानियत

ग़मगीन हृदय है सोचकर ये.. उस मासूम ने क्या महसूस किया होगा जब नन्ही सी बच्ची ने इतनी पीड़ा को सहा होगा रोम रोम उसका चीखा होगा मंदिर का ईश्वर भी उसके साथ रोया होगा ऐसे दानवों को न दुनिया में भेजा होता न देवी जैसी मासूम बच्चियों के संग ऐसा होता न मंदिर का कोना नापाक होता #Ashifa 😢