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Showing posts from March, 2018

वक़्त

वक़्त की क्या खूब कहानी है, कभी कटता नहीं कभी रुकता नहीं है। घड़ी मिलन की कुछ पल में चली जाती है, जुदाई का लम्हा खत्म नहीं होता है। वक़्त की दहलीज में वो हमें बाँधते हैं, वो नहीं समझते चाहत की कोई हद नहीं है। हम उन्हें बेपरवाह, बेइंतहा, बेहद चाहते हैं, फिर साथ रहने की वो हद में क्यों बाँधते हैं? आज संग रहने का वक़्त नहीं है, कल होगा वक़्त तो क्या पता कौन कहाँ है? मिले जो ख़ुशियाँ जी भरकर जीना है, क्यों वक़्त के नाम रोना है?? वक़्त हो न हो तू हर लम्हा मुझमें बसता है, तेरे ही नाम से ये दिल मेरा धड़कता है। जब भी तू हमें पुकारता है, सब भूल हम तेरे ही संग संग होते हैं। नीति

इंतजार

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दिनकर ने छिपकर की धरा संग आँख मिचौली, ऋतु है मस्तानी बदरा में पंक्षियों की रैली। बिखरी है कुसुम सुगन्ध भ्रमर करता अठखेली, तरु झूमे शीतल समीर से लता खुश होकर झूली। पतझड़ की ऋत...

खामोशी

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कभी पढ़ लेना खामोशी से खामोशी को, महसूस करना मेरी धड़कनों को। पा लेना अपना प्रेम देख लेना खुद को, दर्द छिपा होगा तेरे इंतजार का। कहानी मिलेगी मेरे बेपनाह प्रेम की। शिकायतें होंगी रूठने पर ना मनाने की, जिद होगी पास मेरे रहने की। गुजारिश होगी दूर नहीं जाने की, दुआएँ होंगी तेरी खुशियों की, सजदे मिलेंगे इतनी मुहब्बत देने की। नीति

भारत माँ

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निर्धन जनता बिलख रही है, मानवता रो रही है। प्रजातंत्र का हाल बुरा है, हर नेता भ्रष्टाचारी है। चारों तरफ लाचारी फैली है, कितने आप सुरक्षित हैं। हर तरफ होता बिखराव है, जाति धर्म में बिखर रहे हैं। कुर्सी को नेता लड़ते हैं, जनता मोहरा बनती है। ऐसा बुरा हाल देश का है, देख भारत माँ रोती हैं। नीति

महिला दिवस

जो लोग आज महिला दिवस पर बधाई और सम्मान की बात कर रहे हैं उनमें से बहुत से लोग ऐसे हैं जिनके मन में नारी के प्रति तनिक भी सम्मान नहीं है। कुछ लोग घर में माँ बहन का तो सम्मान करते हैं मगर पराई नारी को गलत दृष्टि से देखते हैं। उन सब के लिए मेरी कुछ पंक्तियाँ :- नारी है सबसे प्यारी, फिर क्यों बने तुम अत्याचारी ?? कमजोर नहीं होती नारी, होती है सब पर भारी। होती है वो सदाचारी, फिर भी जाती दुत्कारी। करती है सम्मान वो न्यारी, होती है सबसे प्यारी। नीति

मेरे कान्हा

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राधिका हृदय में बसे हुए हैं कान्हा। रूह में हैं कान्हा साँसों में हैं कान्हा। मीरा की भक्ति में हैं बस कान्हा। गोपियाँ हैं जिसकी दिवानी वो कान्हा। माँ के आँचल में छिप जाते कान्हा। ग्वालों संग माखन चुराते कान्हा। गोपियों को छेड़े सताते थे कान्हा। संग उनके रास रचाते थे कान्हा। गोकुल में सबको सताते थे कान्हा। फिर भी सभी के दुलारे थे कान्हा। नन्द के प्यारे सबके लाडले कान्हा। जग के हैं पूजित मनमोहक कान्हा। जय श्री कृष्णा🙏 नीति

तड़प

वक्त तुझसे मिलन का पर मजबूर थे हम घड़ी संग रहने की मगर तन्हा रहे हम बेचैन थे तुमसे मिलन के लिए हम हम तड़पते रहे तुम भी तड़पे सनम संग सब थे मगर ख्यालों में तुम महफिल सजी याद आते हो तुम तुम्हारी कमी है तरसते हैं हम तुम चाहत है इतनी पर जुदा हैं सनम तुम्हारे लिए दुआ करते हैं हम तेरी खुशी के खातिर टूट जाएँगे हम तुम हो सलामत तो सलामत हैं हम तेरे आँसुओं में डूब जाएँगे हम सनम तेरे दर्द ले लेंगे तुझे टूटने न देंगे हम तुम न होना जुदा तुझे है कसम दूर हो करके तुझसे जी न पाएँगे हम तुम हो मेरे सदा हम तुम्हारे सनम नीति

प्रेम

तेरा बेपनाह प्रेम जीने का सहारा है मेरा खूबसूरत अहसासों में नाम है सिर्फ तेरा लफ्ज़ों में नहीं रूह में बस गया है साया तेरा तुझसे, तेरे जीवन से जुड़ गया अब रिश्ता मेरा तेरी चाहत में फर्क आए फिर भी तू है मेरा दूर कितना भी रहो दिल में रहेगा नाम तेरा नैनों में बसा है ख्वाब सिर्फ तेरा तेरे प्रेम पर हक है सिर्फ और सिर्फ मेरा नीति$

कश्मकश

घिरी हुई हूँ खामोशी के बादलों में, ना जाने किसके इंतजार में। हताशा की गहरी खाई में, डूबी हूँ तन्हाई के समन्दर में। विचारों की उथल-पुथल में, भटकती हूँ सुनसान जंगलों में। लगता है अकेली हूँ वीरान खण्हर में, ना जाने हूँ किसके इंतजार में। चिंतित हूँ क्यों आई इस जीवन में, चली जा रही हूँ बेमक्सद अंजान राहों में। क्या सोच ईश्वर ने भेजा इस जहाँ में, क्या किया अब तक ज़िन्दगी में। क्या करूँ ऐसा कुछ कर पाऊँ दुनिया में, डूबी हुई हूँ अन्जान ख्यालों में। कहाँ जाना है जाने हूँ मैं किस इंतजार में, कैसे सुलझाऊँ उलझन, हूँ मैं कश्मकश में। नीति

गुजारिश

रख लूँगी दबाकर सीने में तुझे, तुम बनकर धड़कन चले आना। जमाने की नजर ना लग जाए तुझे, तुम ख्वाबों में चुपके से आ जाना। मिलकर ना कभी जुदा करना हमें, जाना तो रूह संग ले जाना। जाएँ जो कभी दुनिया से छोड़कर तुझे, दो फूल मुहब्बत के गिरा देना। मिलने की तमन्ना हो जो तुझे, कफन चेहरे से हटा देना। नीति