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Showing posts from February, 2018

यादें

काश ऐसा दिन ना आए..... जब तू मेरी बातों से नहीं, मुझसे बात करने को परेशां हो। एक अहसास हो महसूस मेरी आवाज हो, जो गुजारिश करे कुछ पल मेरे संग रहो। तब हम ना हों बस मेरी यादें हों, एक साया मेरे ख्यालों का तेरे संग हो। हम तड़प जाएँगे कि तुम परेशां हो, ना होकर भी मेरी दुआएँ तेरे साथ हों। तू रह सके बिन हमारे हर खुशी तेरे पास हो, याद आए तो भीगी पलकें और होंठो पर मुस्कान हो। है जब तक जीवन तेरा मेरा संग और प्रेम हो, बस यही आरजू यही हृदय से फरियाद हो। नीति

आखिरी वक्त

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जो काम हो कल पर न टालो, जो रिश्ते उलझे आज सँवार लो। आत्मा ना जाने कब मिल जाए परमात्मा से, कब दूर हो जाएँ हम अपने अजीज़ से। ना कोई भरोसा कब साँस अंतिम हो, आज मिले कल ना दर्शन हो। दिनकर के संग अस्त जीवन हो, या चन्दा के संग डूब जाए जिन्गानी। जो संग हो तुम्हारे हर खुशी उनको दो, वक्त का क्या पता कब कैसा हो। आज मिले कल बिछड़ना पड़े, क्या खबर कब आखिरी वक्त आए। श्रीदेवी जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि🌹 ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ति दें🙏😢 नीति

नारी

किसी ने कहा है..... "यत्र नार्यश्यु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता।"     वह घर हमेशा खुशहाल और सम्पन्न होता है जहाँ नारियों को सम्मान और प्रेम दिया जाता है।  नारी माँ, बहन, बेटी, पत्नी, दोस्त हर रूप में खुद को पूरी तरह समर्पित कर देती है। जरूरत है उसकी भावनाओं को समझने की सच्चा साथ निभाने की।      आज स्थिति दयनीय हो गई है।  कहने को आजाद है नारी पर सचमुच में क्या आजाद है वो ?? बिल्कुल नहीं.. बाहर गिद्ध सी नजर रखने वाले कितने ही लोगों से उसे खुद को बचाती फिरती है वो।  घर पर छोटी सी बच्ची जो कुछ समझती भी नहीं वो बुरी नीयत का शिकार हो जाती है। बढती बच्चियों पर और महिलाओं पर तो लोग आसानी से उँगली उठाते हैं कभी चरित्र, कभी संस्कार और कभी वक्त को लेकर। पर मासूम बच्चियों के साथ जो हुआ वो किसका दोष ?? घिनौनी मानसिकता से पीड़ित लोग किसी को कुछ नहीं समझते। ज़िन्दगी खेल हो गई है उनके लिए।      कभी प्रेम के नाम पर धोखा खाती है, कभी ससुराल में सताई जाती है, कभी कोई सगा ही ठग लेता है उसकी मासूमियत को।      हर वक्त, हर उम्र में ना...

झलक

सबसे करीब भी है, और बहुत दूर भी है, एक झलक पाने को मगर, दिल में तड़प भी है। झिझक भी है, ललक भी है, ना मिलने की मगर, हरपल कसक भी है। तन्हाई भी है, महफिल भी है, इन्तजार में मगर, एक बेचैनी भी है। मिलन की चाह भी है, और डर भी है, विरह का मगर, हृदय में दर्द भी है । दिल में भी है, धड़कन में भी है, ख्वाबों में नहीं मगर, रूह में भी है। ख्यालों में भी है, अहसासों में भी है, झलक नहीं मिलती मगर, नज़र में भी है। नीति

रक्त रंजिर धरा

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रक्त रंजित धरा, देख हृदय है डरा। छिन्न-भिन्न हुई मानवता, रो रही हैं भारत माता। दया हृदय से मिटी, बच्ची पर भी आँख उठी। तोड़ सब अब खामोशी, खत्म कर दो बेबसी। खेल मत रक्त की होली, कर न माँ को अपनी मैली। पकड़कर मानवता का हाथ, चलना है हमें साथ-साथ। मिटाना है अत्याचार, दूर करना है अँधकार। नीति

जीवन

अकेले आए हैं और अकेले ही जाना है। रस्ते में कितने अजीज़ मिलते हैं बिछड़ जाते हैं। याद करके उनको हम रोते हैं तड़पते भी हैं। फिर अनजान राह पर निकल पड़ते हैं। गिरते हैं संभलते हैं कितनी चोट खाते हैं। फिर हिम्मत करते हैं और आगे बढ़ते जाते हैं। याद कभी माँ का आँचल आता है। कभी पिता दुलारते और फटकारते हैं। यादों का कारवाँ लेकर हम आगे बढ़ते जाते हैं। आए थे अकेले एक रोज निकल जाना है। जीवन की हर उलझन अकेले ही सुलझाना है। तैरकर भवसागर के पार निकल जाना है। नीति

तन्हाई

तेरा इंतजार करते हुए ऐसा लगता है... जैसे कहीं वीरान रस्ते पर हम बैठे हैं। दूर-दूर तक बस अकेलापन है तन्हाई है, और तुझसे दूरी का अहसास है। नीति

अल्फाज़

अल्फाज़ मेरे खामोशी से तुमसे कुछ कहते हैं। खुशी में मेरे अल्फाज़ शब्दों का रूप लेते हैं। दर्द और नाराज़गी में खामोशी बोलती है। भीगी हुई पलकें फिर अल्फाज़ मेरे कहती हैं। क्या कहूँ कैसे कहूँ हाल ए दिल चुप ही रहते हैं। नीति

अहसास

जन्म से मृत्यु तक अहसासों का घेरा है, माता-पिता के लाड ने पलकों को भिगोया है। यादों में संगी-साथी के खुशियों का डेरा है, बहन-भाई के प्रेम ने हरपल दामन थामा है। जीवनसाथी के अहसासों में चाहतों का घेरा है, खट्टी-मीठी नोकझोंक, जीवन उनके बिन अधूरा है। प्यारी सी मुस्कान में बच्चों संग खुशियों का सबेरा है, प्यारी सी दुनिया है मेरी चंचलता का अँगना है। यादों में जगमग जगमग खुशी और गम का बसेरा है, अहसास खट्टे मीठे हैं हर जीवन अलबेला है। नीति

मरती इंसानियत

जिन्दा हैं लोग मगर जमीर मर चुके हैं इंसानियत को भूल लोग धर्मो में बँट चुके हैं अन्नदाता ( किसान ) गरीबी से मर रहे हैं नेता बस कुर्सी की राजनीति कर रहें हैं रोते हुए भूखे बच्चे नहीं दिख रहे हैं मर गई इंसानियत खुद ऐश कर रहे हैं सैनिकों की शहादत बेकार जा रही है सत्ता बस अपनी जेबें भर रही है जिन्दा हैं लोग मगर जमीर मर चुके हैं। नीति$

रुखसत

वक्त ए रुखसत पर मेरी आ जाना आकर माँग मेरी सजा जाना हर जनम के लिए अपना बना लेना लाल जोड़े में तुम मुझको विदा करना चूमकर माथे को मेरे हमको विदा करना एक बार सीने से लगा लेना जानते हैं रह न पाओगे तुम मेरे बिना रोकर तुम ना हमको तड़पाना खुश रहना कभी तुम न रोना हमें तो हर जनम है साथ रहना नीति

हे ईश्वर!

हे ईश्वर! कैसी तेरी ये दुनिया, कैसी सृष्टि तूने बनाया। किसी के घर में माया, किसी को रोटी को तरसाया। कहीं खुशियों का उजियारा छाया, कहीं गमों का गहरा साया। कोई महफिल सजाकर आया, किसी ने धूप में खुद को झुलसाया। हे ईश्वर! तूने कैसा ये खेल रचाया, सबको एक सा क्यों ना बनाया। नीति
वैलेंटाइन डे स्पेशल🌷 जाने क्यों एक खास दिन बना दिया गया प्रेम का.. मेरा मानना है कि अगर किसी से सच्चा प्रेम हो तो उसका कोई खास दिन नहीं होता.. प्रेम तो हर लम्हा साथ होता है.. एक दूसरे पर अथाह विश्वास और उस विश्वास को कायम रखना प्रेम है.. एक दूसरे की कमियों को स्वीकार करते हुए हरपल साथ निभाना और सुधार की कोशिश करना प्रेम है.. अपनी भावनाओं के साथ ही साथी की भावनाओं की कद्र करना प्रेम है.. हर सुख-दुख में साथ निभाना प्रेम है.. अपने साथी की हर छोटी से छोटी बात का ख्याल रखना प्रेम है.. मगर आज के युग में सच्चा प्रेम बहुत कम दिखता है प्रेम के मायने ही बदल गए हैं अक्सर स्वार्थ में डूबा हुआ प्रेम देखने को मिलता है.. HAPPY VALENTAINS DAY नीति
      मासूम परी और प्यारा फरिश्ता एक परी अपने में मस्त, दुनिया से बेखबर, मसरूफ अपने जीवन में, ना चिन्ता ना फिकर। आएगा प्यारा फरिश्ता लेकर प्रेम, ना थी उसे खबर। बोला था उसने तुझसे प्रेम है मुझे बेसुमार। बहने लगी अब वो भी चाहत में हद से पार, जीवन में दोनों के छाई चाहत की बहार। जीने लगी ख्वाबों की दुनिया में, करती है इंतजार, मगर रास्ते अलग हैं उनके, कैसे होगी नैया पार। नीति
                    तेरा संग तू आए ना आए इंतजार में नज़रें बिछाए बैठे रहेंगे, तू भूलने की कोशिश भी करे हम याद आया करेंगे। खता जो होगी तेरी हम कभी खफा ना होंगे, शिकवा गर होगा कभी हम शिकायत न करेंगे। कोई गर आएगा तेरे जीवन में हम सह न पाएँगे, तेरे बिन ऐ सनम हम मर ही जाएँगे। तेरा संग इस जनम ही नहीं हर जनम माँगेंगे, तेरा संग मेरे हमदम हर कदम निभाएँगे। नीति
जीवन पथ जीवन पथ पर बढते जाना, साथी को संग लेकर चलना। मुश्किल से तू मत घबराना, एक दूजे का साथ निभाना। काँटों पर भी चलते जाना, हर मंजिल तुम पाते जाना। फूलों की खुशबू सा बनना, पंछी बनकर उड़ते जाना। दिनकर सा रौशन हो जाना, जीवन पथ पर बढते जाना। नीति

इस संसार में "मनुष्य" ऐसा प्राणी है जिसका "जहर" उसके शब्दों में होता है और "दवा" भी शब्दों में ही है.. शब्दों से वो "हर दिल को अजीज़" हो जाता है और किसी का "दुश्मन" भी बन सकता है.. कोशिश करें कि "जो व्यवहार खुद के लिए बुरा लगे वो दूसरों के साथ कभी ना करें।" नीति$

इस संसार में "मनुष्य" ऐसा प्राणी है जिसका "जहर" उसके शब्दों में होता है और "दवा" भी शब्दों में ही है.. शब्दों से वो "हर दिल को अजीज़" हो जाता है और किसी का "दुश्मन" भी बन सकता है.. कोशिश करें कि "जो व्यवहार खुद के लिए बुरा लगे वो दूसरों के साथ कभी ना करें।" नीति
राजनीति और सामान्य इंसान नेता कुर्सी की लालच में घिनौने खेल खेलते हैं सामान्य इंसान कठपुतली बन उनके इशारों पर नाचते हैं नेता भरता अपनी तिजोरी हमारी रहती खाली झोली सम्प्रदाय के नाम पर हमें लड़ाकर खुद बैठे हैं सत्ता पाकर अँग्रेजों की नीति अपनाकर करते हमपर राज भारतीय सामान का करो इस्तेमाल कहकर रहते उनके विदेशी ठाठ कल भी बने हम मूर्ख आज भी हाल वही है ना कल सुधरा था कुछ ना सुधरा आज है नीति