मरती इंसानियत
जिन्दा हैं लोग मगर जमीर मर चुके हैं
इंसानियत को भूल लोग धर्मो में बँट चुके हैं
अन्नदाता ( किसान ) गरीबी से मर रहे हैं
नेता बस कुर्सी की राजनीति कर रहें हैं
रोते हुए भूखे बच्चे नहीं दिख रहे हैं
मर गई इंसानियत खुद ऐश कर रहे हैं
सैनिकों की शहादत बेकार जा रही है
सत्ता बस अपनी जेबें भर रही है
जिन्दा हैं लोग मगर जमीर मर चुके हैं।
नीति$
इंसानियत को भूल लोग धर्मो में बँट चुके हैं
अन्नदाता ( किसान ) गरीबी से मर रहे हैं
नेता बस कुर्सी की राजनीति कर रहें हैं
रोते हुए भूखे बच्चे नहीं दिख रहे हैं
मर गई इंसानियत खुद ऐश कर रहे हैं
सैनिकों की शहादत बेकार जा रही है
सत्ता बस अपनी जेबें भर रही है
जिन्दा हैं लोग मगर जमीर मर चुके हैं।
नीति$
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