राजनीति और सामान्य इंसान

नेता कुर्सी की लालच में घिनौने खेल खेलते हैं
सामान्य इंसान कठपुतली बन उनके इशारों पर नाचते हैं

नेता भरता अपनी तिजोरी
हमारी रहती खाली झोली

सम्प्रदाय के नाम पर हमें लड़ाकर
खुद बैठे हैं सत्ता पाकर

अँग्रेजों की नीति अपनाकर करते हमपर राज
भारतीय सामान का करो इस्तेमाल कहकर रहते उनके विदेशी ठाठ

कल भी बने हम मूर्ख आज भी हाल वही है
ना कल सुधरा था कुछ ना सुधरा आज है
नीति



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