इस संसार में "मनुष्य" ऐसा प्राणी है जिसका "जहर" उसके शब्दों में होता है और "दवा" भी शब्दों में ही है.. शब्दों से वो "हर दिल को अजीज़" हो जाता है और किसी का "दुश्मन" भी बन सकता है.. कोशिश करें कि "जो व्यवहार खुद के लिए बुरा लगे वो दूसरों के साथ कभी ना करें।" नीति$
इस संसार में "मनुष्य" ऐसा प्राणी है जिसका "जहर" उसके शब्दों में होता है और "दवा" भी शब्दों में ही है.. शब्दों से वो "हर दिल को अजीज़" हो जाता है और किसी का "दुश्मन" भी बन सकता है.. कोशिश करें कि "जो व्यवहार खुद के लिए बुरा लगे वो दूसरों के साथ कभी ना करें।"
नीति
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