मासूम परी और प्यारा फरिश्ता

एक परी अपने में मस्त, दुनिया से बेखबर,
मसरूफ अपने जीवन में, ना चिन्ता ना फिकर।

आएगा प्यारा फरिश्ता लेकर प्रेम, ना थी उसे खबर।
बोला था उसने तुझसे प्रेम है मुझे बेसुमार।

बहने लगी अब वो भी चाहत में हद से पार,
जीवन में दोनों के छाई चाहत की बहार।

जीने लगी ख्वाबों की दुनिया में, करती है इंतजार,
मगर रास्ते अलग हैं उनके, कैसे होगी नैया पार।

नीति

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