हे ईश्वर!

हे ईश्वर!
कैसी तेरी ये दुनिया,
कैसी सृष्टि तूने बनाया।

किसी के घर में माया,
किसी को रोटी को तरसाया।

कहीं खुशियों का उजियारा छाया,
कहीं गमों का गहरा साया।

कोई महफिल सजाकर आया,
किसी ने धूप में खुद को झुलसाया।

हे ईश्वर!
तूने कैसा ये खेल रचाया,
सबको एक सा क्यों ना बनाया।

नीति

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