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Showing posts from 2018

प्रेम हमारा 🌹

अधूरी ख्वाहिशों में सम्पूर्ण प्रेम हमारा ना एक झलक देखा फिर अहसास होता है तुम्हारा किस्मत में नहीं तू फिर भी हर दुआ में नाम तुम्हारा तू दूर बहुत है पर हर लम्हा होता है साथ हमारा दिल की हर धड़कन पुकारे नाम तुम्हारा महफ़िल हो या तन्हाई हो होता है ख्याल तुम्हारा चाहा जब कुछ लिखना आया सिर्फ नाम तुम्हारा मेरे हर पल में जीवन में है बस प्रेम तुम्हारा क्या कहूं क्या लिखूं तू ही है जीने का सहारा नीति

जरा अधूरा दिन है !

धुंधला उजाला है या धुंधला दिन है ऑंखें कमजोर या उम्र कमनशीन है! एक उम्र ही है जो गुजरकर आगे बढ़ती है समय से सबसे अपने पराये से लड़ती है! खुरदरे पल है या खुरदरी पलकें एक गुजरा मेर...

अँधेरा जीतना है !

विशाल चुनौतियां है मगर योग्यता का हथियार भी है खुदे रास्ते , बारिश की टक्कर हिम्मत से मगर आगे बढ़ना भी है। समय तेज होकर बलवान हो गया मांझी ने कश्ती को लहरों में झोक दिया तूफ़ा...

जीतनी जंग है

कठोर समय के मध्य झूलते हुए संघर्ष के अनमोल क्षणों को रूलते हुए स्वयं को आगे बढ़ाना लक्षयंक है जीतनी जंग है। बेहिसाब रूकावट मन को भींचने लगेगी टूटती सांसे कण्ठ रेतने भी लगेगी करों में लग जायेंगे तालें रंक है किन्तु जीतनी फिर भी जंग है। कम और ज्यादा का गणित छोड़ पकड़ने को न बचा अब मीत थोड़े में विराट से जग को करना दंग है जीतनी जंग है। बाजुओं को फैलाकर आजादी बताना है जख्म खाकर भी खड़े हो जाना है मिटटी से अंकुर का सपना न अब विलम्ब है जीतनी जंग है। कला की अभिव्यक्ति सजना सजाना है भूलकर भी स्मरण का खत रचाना है मुठ्ठी में जिंदगी को...

" तानाशाही "

नमस्ते साथियों,, जीत और हार के बीच का फर्क महज आत्मविश्वास का होना है . अगर आत्मविश्वास आपके पास है तो कोई शक्ति आपको पराजित नही कर सकती . मगर शर्त है आपके लक्ष्यों में कही लालस...

बीतीं जिंदगी की बातें

बीत रही बरसात की बीत रही बातें झलकती मदहोश हो रही अंधी रातें। किले दरक रहे दरवाजें कूढ़ते टीले राह सामने लेकिन फिर भी बिखरे काफिले। घड़ी नाजुक दिन कमजोर साल उंघते काल ने पकड़...

भारत की नई संस्कृति "भीड़तंत्र"

अनहद नमस्कार साथियों , भारत वह देश जो अनहद खूबियां लिए एक स्वर्ग की तरह बसा है । जिसके उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम हर दिशा में विश्व धरोहरें है । लेकिन कुछ समय से कुछ घटनाएँ लगा...

इंसानियत

काफिले की सख्ती से राह में रोड़े है मंजिलें दूर पथिक को गुमनामी ने मोडे है। सुबह सब्जगाही के निराले गुल थे किसी की बुरी नजर में कांटे बबूल थे। कौन नद किनारे बैठ गीत ख़ुशी के गा...

तुम बिन जी न पाएँगे

ना होना तुम परेशान हमारी चाहत से हमें तो मुहब्बत है मेरे जीवन सिर्फ तुमसे दर्द हो गर कोई तो कह देना तुम हमसे तुम बिन जी न पाएँगे हम कसम से हम हर दर्द सह लेंगे पर तुमको हर खुशी देंगे मेरी नजदीकी जो दर्द देगी हम तुमसे दूर चले जाएंगे जिंदगी हो हमारी तुम बिन जी न पाएँगे हम तुमको ना कभी दगा देंगे हर खुशी देने का वादा है हर हाल में निभाएंगे तुम्हारी खुशियों के खातिर खुद को भी मिटाएंगे तुम बिन जी न पाएँगे हम तुम बिन जी न पाएँगे

धुली नजर

धूल गई नजर को एक कतराए इशारा चाहिए पलकों के सावन में ख्वाबों के साथ नहाइये। इरादें लो गजब है क्या खूब ढाते है आँखों से यार चश्मे से बहाते है। नीली नौगाम पहाड़ियों के दर्शन क्...

खूबसूरत ख्वाब

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एक खूबसूरत शाम थी तुम मेरे पास थे तुम्हारा प्यारा सा साथ था वो अहसास बहुत खास था उस अहसास में हम खोए हुए थे दिल चाहा कि तुमको अपना जिस्म बना लूँ या रूह मैं तेरी बन जाऊँ दिल चाहा कि हद से गुजर जाऊँ क्यों ना तेरी साँसों में समा जाऊँ दिल चाहा कि तुझमें समा जाऊँ मगर ये तो सिर्फ ख्वाब ही था जो आँख खुली और टूट गया ना तुम थे ना वो हँसी शाम थी बस अहसास तुम्हारा और तन्हाई थी।

नूर के कंगन

रोम रोम जिसके एक चमक में लिपटे है वो कलाई जिसके पथ पर कालिन नूर के सिमटे है ऐसी खुश्क मीठी उजली हथेली पर जैसे दो जहां उमड़ने को छूटे है। पलको के आँगन में देर सवेर किरणे पड़ी टपक...

लव की लगी है

हाँ हाँ जो नज़र तुझे बाहर लगी है उसके चाहने वाले बहुत है मीठी मीठी हवाओं में झपक खुशबु से बहुत है। जो तार दे जीवन वो बरकत है जिसके आगे नतमस्तक कुदरत है मुझे मिली नेमत सी इस जहा...

गौरांग

किरणों सा जगमग तेज तीव्र क्या तन है वज्र की चमक सा ओज का पैरहन है। क्रोध को निश्चल निष्क्रिय काम को सतेज स्थिर कुठारघात शिथिल हो ऐसी गनगमयी धारा धरा जगत ओ सौंदर्य के बागान ...

गमों को पी जाओ , देश बचाओं

ऐ मेरे शहरियों गमो को भूल जाओ आग खाओं मगर जलाओ मत दीपक भी जलता है मगर जल जलकर उजाला जीवन का दिखलाता है इधर उधर के भटकों को भाव भंगिमा याद् दिलाता है थोडा प्रेम भाव से इन्हें र...

जगी उम्मीद है

जगा जी लगाने की दुनिया नही है फैशन के रास्तों पर जज्बात कहीं नही है। उसूलों के चैम्पियन पैरों में खड़े है अंतर तक उनके दग़ा भरे है। झूठे हो गए जमाने के अलमबरदार होशियार घात कु...

कोहे फिजा

गगन के पीर से कह दो धरती का प्यार आ रहा है मुझसे मेरे दिल को वो बदला बदला सा जा रहा है दुल्हन कुदरत की गलियों में जवान ऐसे फिरते न होंगे अकेले ही मुझसे मेरी रजा को उलझा रहा है ऐ...

गरीब की रोटी

एक टुकड़ा जितना पूण्य दे जाता है जन्म जन्म तक सुख की प्रार्थना कह जाता है हाथ थरथराते जब आगे बढ़ते है सच में ह्रदय भित्तियों से मानो लड़ते है गमगीन निगाहें न जाने किसका प्रतिक...

पीड़ा

हालात बड़े सयाने हो गए गली मुहल्लों में लोग बड़े दीवाने हो गए गरीब को मारकर हंसता है जमाना अब तक क्या किया केवल औरों का दिल दुखाना? हूंक सुनों उन अधमरें जवानों की जो रोज लड़ते श...

रवि की आतुरता

प्यारा हिन्दुस्तान हमारा है काले काले टीले ही सही  मगर वासियों का सहारा है  बादलों में छूप गए बुलबुले  नींद में जमीन खोई हुई  हवाओं में साफ़ खुशबु  इत्र है मानो ओढ़ी हुई  चाल जरा सूरज चल जाता है  लेकिन नाम भारत सुनकर फिर भी मचल जाता है  लाओ मै अँधेरे को रौशनी कर देता हूँ  मगर एक शर्त है आज गलियों में बैठकर  तेरे शहरियों को देखूंगा  उनके संग खेलूंगा फ़िक्र मत करो  मेरी अग्नि पावस से तेरे बच्चे झुलसेगें नहीं  मै शाम को भी साथ लाऊंगा  ठंडी शीतलता बसाऊंगा  बस एक स्पर्श मुझे इनका करा दो  दर्पण से इनमे मुझे ईश्वर को देखना है  है भारत मुझे भी यहां का शहरी बना ले  गगन में थकान है में अब गर्मी पहुंचाते थक चूका हूँ  अब तेरे साये में रहना चाहता हूँ  

जीवन आंकलन

जब से जीवन है मिला  सांसे कभी रूकती कभी चल पड़ती है  इसके चल पड़ने का कोई यकीन नहीं  एक बंधन बढ़ा आगे जिसकी कोई जमीन नहीं  हौसलें कभी मिलते है , कभी हौसले पस्त भी होते है  किन्तु इस बीच बिना जमीन का वह रिश्ता फलता जाता है  सुंदरत उपवन में मानो लालिमा कोई बिखर सी जाती है  जोश दम बल सारे अधूरे है  जबतक ह्रदय में जज्बातों की किरणे नहीं होती  यूही किस्मत किसी किसी की परवान नहीं चढ़ती  आओ इस बरस एक दिप सदर पर जला दें  टूटे  मकानों को सज्जा से मिला दें  फिर न दिप बुझेगा कभी न शहर अँधेरे होंगे  तू ऐ दिल जिसमे राजी वही शामिल होंगे 

उम्र दो पल की है

उम्र दो पल की है   क्या पाना क्या खोना है    जो हो चूका और जो होगा       बस उससे ऑंख मिलाना हे करवट उलाहना जीवन को     बारी बारी करती है         सच तो यह भी है             ये डर डर के आगे बढ़ती है एक कविता मेरी पौष    की झिलमिल सुबह पर       वह राशन रहित बच्चे         खाली पेट ,  बुझे उन चूल्हो पर

शर्मीली निगाहें

शर्मीली निगाहें नखरें हजार दिखाती है चमक जाती हे फिर छुप जाती है।  पलकों के आंगन में नाच रही जैसे मैना  सुरीली राग में घुल मिल जाती है।  पैरों की धूल में धीमी शांत सुबह  लाल बैंगनी किरणों से खेलती   और शाम से जा मिल जाती है . 

धूपांजलि

है बादलों के चंगुल में जगत की जान रे तू सुन ले अब स्वयं ही रखना ध्यान अपना रे किसान से। माटी के मौर्य मुखौटे लिये गली गली में घूम रहे अंजान रे तोड़ मिथक दम का साहस से कर अपना उत्...

तड़प दिल की

ना आँख मिलानी थी ना प्रेम जताना था जब वक़्त न देना था फिर यादें भी न देना था क्यों दूर हो इतने तुम जब दिल में हो सिर्फ तुम क्यों अश्क नहीं रुकते क्यों तुम नहीं समझते क्यों तुम को खबर न होती दिल क्यों तड़पता है तुमको फिक्र न होती क्यों अकेले में अक्सर गिरते हैं अश्क के मोती क्यों मेरी तड़प तुम तक न पहुँच पाती क्यों मेरे याद करने से हिचकियाँ तुम्हें न आती क्यों तुमको मेरी याद अब न सताती तुमसे ओ मेरे जीवन क्यों इतना प्रेम करती नीति

नए भारत की कहानी

नया भारत जग में महान है हर कतरे कतरे में एक इंसान है मिटटी और मेहनत को पिघलाकर करता जीवन का भला आसान है। नया भारत जग में महान है करवट बदलते शिशु को आदत में ढालता देता है खिड़की ...

काम की बातें

भारत का नाम सदैव उसकी विविध संस्क्रति के नाम से विश्व में ख्यात है । लोग यहां कभी अमरनाथ दर्शन को विलायत से आते है , कभी अजमेर में ख्वाजा मुईनुद्दीन की जियारत के लिए आते है । भ...

भावुक मन

जाने ये मन भावुक क्यों हो रहा है ? तुझसे दूर मगर तेरा हो गया है। कैसी ये बेकरारी है ? कैसी ये तड़प है ? मन की सारी बात तुम तक पहुँचानी है। तुमसे चाहे मिलना जुदाई का डर भी है।  रुत ये बदल रही है। इंतजार में अँखियाँ तरस रही हैं। आ जाओ मेरे जानम घड़ियाँ गुजर रही हैं। रुका हुआ है लम्हा धड़कन भी थम गई है। बातों से मन मेरा भावुक हो गया है। नीति

बारिश का मौसम

बारिश का मौसम बड़ा सुहाना है सम्पर्क हवा के झोके में दिल दीवाना है। पत्तों पत्तों में ताजगी बूंदों ने भर दी है लुकाछुपी बरसात ने जन जीवन को तर दी है। अश्कों पर पानी डाल दिया न...

कुछ लम्हे हसीन है

कुछ लम्हे जो हसीन है मेरे ख्वाबों के शानदार दिन है मिले शहर तोहफे में तो बसाऊंगा कहाँ अब वो राह में रात गुजारी सी उम्र कमनसीन है खिड़कियां बंद बाढ़ सी क्या आ गई दरवाजे पर कोई म...

हमारी संस्कृति

नमस्ते साथियों , भारत केवल एक जमीन के टुकड़े का नाम भर नही है। और न ही यह विश्व के और कोई देशों की तरह एक साम्राज्य है । अपितु भारत एक राष्ट्रपुरुष है , जो विश्व में कहीं नही पाया ...

सियासत

खाली सियासत को परवाह न इंसान की है झगड़े दो भाई करें उसे मगर फ़िक्र धनो के खदान की है। चंगी भली गृहस्थी कब कैसे है उजड़ जाएँ उसको तो इनकी लाशों से अपना व्यापार हो जाएं। साम दाम दंड के अकाली घात में लगे बैठते है जब क्षति मान अथवा जान की हो तो इंसाफ देने के लिए ऐंठते है। हमे शक इनके भी इंसान होने पर क्या खूब होता है मात की चीखों में भी अंदर अंदर हर्ष इन्हें होता है।

तुम मेरा इन्तेजार हो

तुम मेरा इन्तेजार हो मेरे दिल के आर - पार हो ऐ मेरी जिंदगी के मालिक हर जगह हंसता हुआ गुलजार हो गीत जबान पर रखते हुए और आँखों में खूब चमकना तेरा मुश्किल घड़ी है और साथ आना तेरा ऐ मेरी जिंदगी के मालिक तुम मेरा इन्तेजार हो। लब से बह निकले आंसुओं को दामन से झाड़ना तेरा पलको को मिल गया है क्या आशियाना तेरा ऐ मेरी जिंदगी के मालिक तुम मेरा इन्तेजार हो।

कली

एक आँगन के गुलशन में, उस घर के माली (मालिक) ने, चाहत के बीज लगाए, उस घर की फुलवारी में। बढ़ा पौधा चाहत का, कली हुई एक प्यारी, महका चमन खुश था माली, बहकी बहकी डाली। हर लम्हा करता रखवाली, बढ़ती कली फैली खुशहाली। कली खिली और फूल बनी, घर आँगन फिर छोड़ चली। जिस गुलशन में कली खिली, जिस माली ने सींची डाली। उस आँगन को छोड़ चली, महकाने दूजी फुलवारी। बस इतनी सी है कहानी, है वो किसी की निशानी। पर जीना है जिंदगानी, दुनिया की है रस्म निभानी। नीति

आँखें

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मेरी आँखें हैं आइना मेरे दिल का, देखकर समझ सकते हैं हाल हमारा। नहीं छुप पाता कुछ भी इन आँखों से, आँखों में है हर राज दिल हमारा। किसी से बात करके भर आती हैं आँखें, किसी की याद में बरस पड़ती हैं आँखें। जुबाँ जो ना बोले वो बोल पड़ती हैं आँखें, दर्द दिल में होता है तड़प जाती हैं आँखें। दरिया की रवानी सी बहती हैं आँखें, मतवाली, बेचैन रहती हैं आँखें। राहों में पलकें बिछाए ये आँखें, खामोश लब से बुलाती ये आँखें। हजारों ख्वाव सजाती हैं आँखें, कभी हँसाती कभी रुलाती हैं आँखें। हर दर्द कह देती हैं आँखें, मेरी आँखें हैं आइना मेरे दिल का ।। नीति

हैवानियत

ग़मगीन हृदय है सोचकर ये.. उस मासूम ने क्या महसूस किया होगा जब नन्ही सी बच्ची ने इतनी पीड़ा को सहा होगा रोम रोम उसका चीखा होगा मंदिर का ईश्वर भी उसके साथ रोया होगा ऐसे दानवों को न दुनिया में भेजा होता न देवी जैसी मासूम बच्चियों के संग ऐसा होता न मंदिर का कोना नापाक होता #Ashifa 😢

वक़्त

वक़्त की क्या खूब कहानी है, कभी कटता नहीं कभी रुकता नहीं है। घड़ी मिलन की कुछ पल में चली जाती है, जुदाई का लम्हा खत्म नहीं होता है। वक़्त की दहलीज में वो हमें बाँधते हैं, वो नहीं समझते चाहत की कोई हद नहीं है। हम उन्हें बेपरवाह, बेइंतहा, बेहद चाहते हैं, फिर साथ रहने की वो हद में क्यों बाँधते हैं? आज संग रहने का वक़्त नहीं है, कल होगा वक़्त तो क्या पता कौन कहाँ है? मिले जो ख़ुशियाँ जी भरकर जीना है, क्यों वक़्त के नाम रोना है?? वक़्त हो न हो तू हर लम्हा मुझमें बसता है, तेरे ही नाम से ये दिल मेरा धड़कता है। जब भी तू हमें पुकारता है, सब भूल हम तेरे ही संग संग होते हैं। नीति

इंतजार

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दिनकर ने छिपकर की धरा संग आँख मिचौली, ऋतु है मस्तानी बदरा में पंक्षियों की रैली। बिखरी है कुसुम सुगन्ध भ्रमर करता अठखेली, तरु झूमे शीतल समीर से लता खुश होकर झूली। पतझड़ की ऋत...

खामोशी

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कभी पढ़ लेना खामोशी से खामोशी को, महसूस करना मेरी धड़कनों को। पा लेना अपना प्रेम देख लेना खुद को, दर्द छिपा होगा तेरे इंतजार का। कहानी मिलेगी मेरे बेपनाह प्रेम की। शिकायतें होंगी रूठने पर ना मनाने की, जिद होगी पास मेरे रहने की। गुजारिश होगी दूर नहीं जाने की, दुआएँ होंगी तेरी खुशियों की, सजदे मिलेंगे इतनी मुहब्बत देने की। नीति

भारत माँ

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निर्धन जनता बिलख रही है, मानवता रो रही है। प्रजातंत्र का हाल बुरा है, हर नेता भ्रष्टाचारी है। चारों तरफ लाचारी फैली है, कितने आप सुरक्षित हैं। हर तरफ होता बिखराव है, जाति धर्म में बिखर रहे हैं। कुर्सी को नेता लड़ते हैं, जनता मोहरा बनती है। ऐसा बुरा हाल देश का है, देख भारत माँ रोती हैं। नीति

महिला दिवस

जो लोग आज महिला दिवस पर बधाई और सम्मान की बात कर रहे हैं उनमें से बहुत से लोग ऐसे हैं जिनके मन में नारी के प्रति तनिक भी सम्मान नहीं है। कुछ लोग घर में माँ बहन का तो सम्मान करते हैं मगर पराई नारी को गलत दृष्टि से देखते हैं। उन सब के लिए मेरी कुछ पंक्तियाँ :- नारी है सबसे प्यारी, फिर क्यों बने तुम अत्याचारी ?? कमजोर नहीं होती नारी, होती है सब पर भारी। होती है वो सदाचारी, फिर भी जाती दुत्कारी। करती है सम्मान वो न्यारी, होती है सबसे प्यारी। नीति

मेरे कान्हा

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राधिका हृदय में बसे हुए हैं कान्हा। रूह में हैं कान्हा साँसों में हैं कान्हा। मीरा की भक्ति में हैं बस कान्हा। गोपियाँ हैं जिसकी दिवानी वो कान्हा। माँ के आँचल में छिप जाते कान्हा। ग्वालों संग माखन चुराते कान्हा। गोपियों को छेड़े सताते थे कान्हा। संग उनके रास रचाते थे कान्हा। गोकुल में सबको सताते थे कान्हा। फिर भी सभी के दुलारे थे कान्हा। नन्द के प्यारे सबके लाडले कान्हा। जग के हैं पूजित मनमोहक कान्हा। जय श्री कृष्णा🙏 नीति

तड़प

वक्त तुझसे मिलन का पर मजबूर थे हम घड़ी संग रहने की मगर तन्हा रहे हम बेचैन थे तुमसे मिलन के लिए हम हम तड़पते रहे तुम भी तड़पे सनम संग सब थे मगर ख्यालों में तुम महफिल सजी याद आते हो तुम तुम्हारी कमी है तरसते हैं हम तुम चाहत है इतनी पर जुदा हैं सनम तुम्हारे लिए दुआ करते हैं हम तेरी खुशी के खातिर टूट जाएँगे हम तुम हो सलामत तो सलामत हैं हम तेरे आँसुओं में डूब जाएँगे हम सनम तेरे दर्द ले लेंगे तुझे टूटने न देंगे हम तुम न होना जुदा तुझे है कसम दूर हो करके तुझसे जी न पाएँगे हम तुम हो मेरे सदा हम तुम्हारे सनम नीति

प्रेम

तेरा बेपनाह प्रेम जीने का सहारा है मेरा खूबसूरत अहसासों में नाम है सिर्फ तेरा लफ्ज़ों में नहीं रूह में बस गया है साया तेरा तुझसे, तेरे जीवन से जुड़ गया अब रिश्ता मेरा तेरी चाहत में फर्क आए फिर भी तू है मेरा दूर कितना भी रहो दिल में रहेगा नाम तेरा नैनों में बसा है ख्वाब सिर्फ तेरा तेरे प्रेम पर हक है सिर्फ और सिर्फ मेरा नीति$

कश्मकश

घिरी हुई हूँ खामोशी के बादलों में, ना जाने किसके इंतजार में। हताशा की गहरी खाई में, डूबी हूँ तन्हाई के समन्दर में। विचारों की उथल-पुथल में, भटकती हूँ सुनसान जंगलों में। लगता है अकेली हूँ वीरान खण्हर में, ना जाने हूँ किसके इंतजार में। चिंतित हूँ क्यों आई इस जीवन में, चली जा रही हूँ बेमक्सद अंजान राहों में। क्या सोच ईश्वर ने भेजा इस जहाँ में, क्या किया अब तक ज़िन्दगी में। क्या करूँ ऐसा कुछ कर पाऊँ दुनिया में, डूबी हुई हूँ अन्जान ख्यालों में। कहाँ जाना है जाने हूँ मैं किस इंतजार में, कैसे सुलझाऊँ उलझन, हूँ मैं कश्मकश में। नीति

गुजारिश

रख लूँगी दबाकर सीने में तुझे, तुम बनकर धड़कन चले आना। जमाने की नजर ना लग जाए तुझे, तुम ख्वाबों में चुपके से आ जाना। मिलकर ना कभी जुदा करना हमें, जाना तो रूह संग ले जाना। जाएँ जो कभी दुनिया से छोड़कर तुझे, दो फूल मुहब्बत के गिरा देना। मिलने की तमन्ना हो जो तुझे, कफन चेहरे से हटा देना। नीति

यादें

काश ऐसा दिन ना आए..... जब तू मेरी बातों से नहीं, मुझसे बात करने को परेशां हो। एक अहसास हो महसूस मेरी आवाज हो, जो गुजारिश करे कुछ पल मेरे संग रहो। तब हम ना हों बस मेरी यादें हों, एक साया मेरे ख्यालों का तेरे संग हो। हम तड़प जाएँगे कि तुम परेशां हो, ना होकर भी मेरी दुआएँ तेरे साथ हों। तू रह सके बिन हमारे हर खुशी तेरे पास हो, याद आए तो भीगी पलकें और होंठो पर मुस्कान हो। है जब तक जीवन तेरा मेरा संग और प्रेम हो, बस यही आरजू यही हृदय से फरियाद हो। नीति

आखिरी वक्त

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जो काम हो कल पर न टालो, जो रिश्ते उलझे आज सँवार लो। आत्मा ना जाने कब मिल जाए परमात्मा से, कब दूर हो जाएँ हम अपने अजीज़ से। ना कोई भरोसा कब साँस अंतिम हो, आज मिले कल ना दर्शन हो। दिनकर के संग अस्त जीवन हो, या चन्दा के संग डूब जाए जिन्गानी। जो संग हो तुम्हारे हर खुशी उनको दो, वक्त का क्या पता कब कैसा हो। आज मिले कल बिछड़ना पड़े, क्या खबर कब आखिरी वक्त आए। श्रीदेवी जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि🌹 ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ति दें🙏😢 नीति

नारी

किसी ने कहा है..... "यत्र नार्यश्यु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता।"     वह घर हमेशा खुशहाल और सम्पन्न होता है जहाँ नारियों को सम्मान और प्रेम दिया जाता है।  नारी माँ, बहन, बेटी, पत्नी, दोस्त हर रूप में खुद को पूरी तरह समर्पित कर देती है। जरूरत है उसकी भावनाओं को समझने की सच्चा साथ निभाने की।      आज स्थिति दयनीय हो गई है।  कहने को आजाद है नारी पर सचमुच में क्या आजाद है वो ?? बिल्कुल नहीं.. बाहर गिद्ध सी नजर रखने वाले कितने ही लोगों से उसे खुद को बचाती फिरती है वो।  घर पर छोटी सी बच्ची जो कुछ समझती भी नहीं वो बुरी नीयत का शिकार हो जाती है। बढती बच्चियों पर और महिलाओं पर तो लोग आसानी से उँगली उठाते हैं कभी चरित्र, कभी संस्कार और कभी वक्त को लेकर। पर मासूम बच्चियों के साथ जो हुआ वो किसका दोष ?? घिनौनी मानसिकता से पीड़ित लोग किसी को कुछ नहीं समझते। ज़िन्दगी खेल हो गई है उनके लिए।      कभी प्रेम के नाम पर धोखा खाती है, कभी ससुराल में सताई जाती है, कभी कोई सगा ही ठग लेता है उसकी मासूमियत को।      हर वक्त, हर उम्र में ना...

झलक

सबसे करीब भी है, और बहुत दूर भी है, एक झलक पाने को मगर, दिल में तड़प भी है। झिझक भी है, ललक भी है, ना मिलने की मगर, हरपल कसक भी है। तन्हाई भी है, महफिल भी है, इन्तजार में मगर, एक बेचैनी भी है। मिलन की चाह भी है, और डर भी है, विरह का मगर, हृदय में दर्द भी है । दिल में भी है, धड़कन में भी है, ख्वाबों में नहीं मगर, रूह में भी है। ख्यालों में भी है, अहसासों में भी है, झलक नहीं मिलती मगर, नज़र में भी है। नीति

रक्त रंजिर धरा

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रक्त रंजित धरा, देख हृदय है डरा। छिन्न-भिन्न हुई मानवता, रो रही हैं भारत माता। दया हृदय से मिटी, बच्ची पर भी आँख उठी। तोड़ सब अब खामोशी, खत्म कर दो बेबसी। खेल मत रक्त की होली, कर न माँ को अपनी मैली। पकड़कर मानवता का हाथ, चलना है हमें साथ-साथ। मिटाना है अत्याचार, दूर करना है अँधकार। नीति

जीवन

अकेले आए हैं और अकेले ही जाना है। रस्ते में कितने अजीज़ मिलते हैं बिछड़ जाते हैं। याद करके उनको हम रोते हैं तड़पते भी हैं। फिर अनजान राह पर निकल पड़ते हैं। गिरते हैं संभलते हैं कितनी चोट खाते हैं। फिर हिम्मत करते हैं और आगे बढ़ते जाते हैं। याद कभी माँ का आँचल आता है। कभी पिता दुलारते और फटकारते हैं। यादों का कारवाँ लेकर हम आगे बढ़ते जाते हैं। आए थे अकेले एक रोज निकल जाना है। जीवन की हर उलझन अकेले ही सुलझाना है। तैरकर भवसागर के पार निकल जाना है। नीति

तन्हाई

तेरा इंतजार करते हुए ऐसा लगता है... जैसे कहीं वीरान रस्ते पर हम बैठे हैं। दूर-दूर तक बस अकेलापन है तन्हाई है, और तुझसे दूरी का अहसास है। नीति

अल्फाज़

अल्फाज़ मेरे खामोशी से तुमसे कुछ कहते हैं। खुशी में मेरे अल्फाज़ शब्दों का रूप लेते हैं। दर्द और नाराज़गी में खामोशी बोलती है। भीगी हुई पलकें फिर अल्फाज़ मेरे कहती हैं। क्या कहूँ कैसे कहूँ हाल ए दिल चुप ही रहते हैं। नीति

अहसास

जन्म से मृत्यु तक अहसासों का घेरा है, माता-पिता के लाड ने पलकों को भिगोया है। यादों में संगी-साथी के खुशियों का डेरा है, बहन-भाई के प्रेम ने हरपल दामन थामा है। जीवनसाथी के अहसासों में चाहतों का घेरा है, खट्टी-मीठी नोकझोंक, जीवन उनके बिन अधूरा है। प्यारी सी मुस्कान में बच्चों संग खुशियों का सबेरा है, प्यारी सी दुनिया है मेरी चंचलता का अँगना है। यादों में जगमग जगमग खुशी और गम का बसेरा है, अहसास खट्टे मीठे हैं हर जीवन अलबेला है। नीति

मरती इंसानियत

जिन्दा हैं लोग मगर जमीर मर चुके हैं इंसानियत को भूल लोग धर्मो में बँट चुके हैं अन्नदाता ( किसान ) गरीबी से मर रहे हैं नेता बस कुर्सी की राजनीति कर रहें हैं रोते हुए भूखे बच्चे नहीं दिख रहे हैं मर गई इंसानियत खुद ऐश कर रहे हैं सैनिकों की शहादत बेकार जा रही है सत्ता बस अपनी जेबें भर रही है जिन्दा हैं लोग मगर जमीर मर चुके हैं। नीति$

रुखसत

वक्त ए रुखसत पर मेरी आ जाना आकर माँग मेरी सजा जाना हर जनम के लिए अपना बना लेना लाल जोड़े में तुम मुझको विदा करना चूमकर माथे को मेरे हमको विदा करना एक बार सीने से लगा लेना जानते हैं रह न पाओगे तुम मेरे बिना रोकर तुम ना हमको तड़पाना खुश रहना कभी तुम न रोना हमें तो हर जनम है साथ रहना नीति