अँधेरा जीतना है !
विशाल चुनौतियां है मगर
योग्यता का हथियार भी है
खुदे रास्ते , बारिश की टक्कर
हिम्मत से मगर आगे बढ़ना भी है।
समय तेज होकर बलवान हो गया
मांझी ने कश्ती को लहरों में झोक दिया
तूफ़ानी यलगारों का अभिषेक होने लगा है
पीछे छुट गया जमाने का दगा है।
मुझे लोगों की सांसों की चिंता है खा रही
मस्त हवा यारों को है बुला रही
चमन में रहा क्या उजाला गजब
देखकर क्या खुश हो रहा रब!
मुहब्बत के ताने बाने में दिल लगा है
तोड़ दिया विश्वास लेकिन फिर रंगा है
उसूलों को रख दरकिनार
हिंसा से नही उठाएंगे हथियार
काफिलों को मत बनाओं उग्र
घरों को न जलाओ निशाचरों के अग्र
लोग मरेंगे तो दुनिया भी न बचेगी
खुशियाँ एक के लिए नही सबके लिए रहेगी।
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