जरा अधूरा दिन है !
धुंधला उजाला है या धुंधला दिन है
ऑंखें कमजोर या उम्र कमनशीन है!
एक उम्र ही है जो गुजरकर आगे बढ़ती है
समय से सबसे अपने पराये से लड़ती है!
खुरदरे पल है या खुरदरी पलकें
एक गुजरा मेरे सामने से प्यारी लिये झलकें।
आसारे तूफ़ान का अंदाजा नही है
गम बड़े लिए मेरे आसपास कहीं है।
ढोल बजता ही है जगने जगाने को
मगर हमसफ़र नही होता जाने खो।
ता उम्र गिला करके क्या साथ ले जायेंगे
मुहब्बत में ताने सुनकर दिन बिताएं है।
ले फ़िक्र उसकी जो जमाना है सारा
ख़ुशी गम का बुनता है ताना बाना।
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