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Showing posts from June, 2018

तुम बिन जी न पाएँगे

ना होना तुम परेशान हमारी चाहत से हमें तो मुहब्बत है मेरे जीवन सिर्फ तुमसे दर्द हो गर कोई तो कह देना तुम हमसे तुम बिन जी न पाएँगे हम कसम से हम हर दर्द सह लेंगे पर तुमको हर खुशी देंगे मेरी नजदीकी जो दर्द देगी हम तुमसे दूर चले जाएंगे जिंदगी हो हमारी तुम बिन जी न पाएँगे हम तुमको ना कभी दगा देंगे हर खुशी देने का वादा है हर हाल में निभाएंगे तुम्हारी खुशियों के खातिर खुद को भी मिटाएंगे तुम बिन जी न पाएँगे हम तुम बिन जी न पाएँगे

धुली नजर

धूल गई नजर को एक कतराए इशारा चाहिए पलकों के सावन में ख्वाबों के साथ नहाइये। इरादें लो गजब है क्या खूब ढाते है आँखों से यार चश्मे से बहाते है। नीली नौगाम पहाड़ियों के दर्शन क्...

खूबसूरत ख्वाब

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एक खूबसूरत शाम थी तुम मेरे पास थे तुम्हारा प्यारा सा साथ था वो अहसास बहुत खास था उस अहसास में हम खोए हुए थे दिल चाहा कि तुमको अपना जिस्म बना लूँ या रूह मैं तेरी बन जाऊँ दिल चाहा कि हद से गुजर जाऊँ क्यों ना तेरी साँसों में समा जाऊँ दिल चाहा कि तुझमें समा जाऊँ मगर ये तो सिर्फ ख्वाब ही था जो आँख खुली और टूट गया ना तुम थे ना वो हँसी शाम थी बस अहसास तुम्हारा और तन्हाई थी।

नूर के कंगन

रोम रोम जिसके एक चमक में लिपटे है वो कलाई जिसके पथ पर कालिन नूर के सिमटे है ऐसी खुश्क मीठी उजली हथेली पर जैसे दो जहां उमड़ने को छूटे है। पलको के आँगन में देर सवेर किरणे पड़ी टपक...

लव की लगी है

हाँ हाँ जो नज़र तुझे बाहर लगी है उसके चाहने वाले बहुत है मीठी मीठी हवाओं में झपक खुशबु से बहुत है। जो तार दे जीवन वो बरकत है जिसके आगे नतमस्तक कुदरत है मुझे मिली नेमत सी इस जहा...

गौरांग

किरणों सा जगमग तेज तीव्र क्या तन है वज्र की चमक सा ओज का पैरहन है। क्रोध को निश्चल निष्क्रिय काम को सतेज स्थिर कुठारघात शिथिल हो ऐसी गनगमयी धारा धरा जगत ओ सौंदर्य के बागान ...

गमों को पी जाओ , देश बचाओं

ऐ मेरे शहरियों गमो को भूल जाओ आग खाओं मगर जलाओ मत दीपक भी जलता है मगर जल जलकर उजाला जीवन का दिखलाता है इधर उधर के भटकों को भाव भंगिमा याद् दिलाता है थोडा प्रेम भाव से इन्हें र...

जगी उम्मीद है

जगा जी लगाने की दुनिया नही है फैशन के रास्तों पर जज्बात कहीं नही है। उसूलों के चैम्पियन पैरों में खड़े है अंतर तक उनके दग़ा भरे है। झूठे हो गए जमाने के अलमबरदार होशियार घात कु...

कोहे फिजा

गगन के पीर से कह दो धरती का प्यार आ रहा है मुझसे मेरे दिल को वो बदला बदला सा जा रहा है दुल्हन कुदरत की गलियों में जवान ऐसे फिरते न होंगे अकेले ही मुझसे मेरी रजा को उलझा रहा है ऐ...

गरीब की रोटी

एक टुकड़ा जितना पूण्य दे जाता है जन्म जन्म तक सुख की प्रार्थना कह जाता है हाथ थरथराते जब आगे बढ़ते है सच में ह्रदय भित्तियों से मानो लड़ते है गमगीन निगाहें न जाने किसका प्रतिक...

पीड़ा

हालात बड़े सयाने हो गए गली मुहल्लों में लोग बड़े दीवाने हो गए गरीब को मारकर हंसता है जमाना अब तक क्या किया केवल औरों का दिल दुखाना? हूंक सुनों उन अधमरें जवानों की जो रोज लड़ते श...

रवि की आतुरता

प्यारा हिन्दुस्तान हमारा है काले काले टीले ही सही  मगर वासियों का सहारा है  बादलों में छूप गए बुलबुले  नींद में जमीन खोई हुई  हवाओं में साफ़ खुशबु  इत्र है मानो ओढ़ी हुई  चाल जरा सूरज चल जाता है  लेकिन नाम भारत सुनकर फिर भी मचल जाता है  लाओ मै अँधेरे को रौशनी कर देता हूँ  मगर एक शर्त है आज गलियों में बैठकर  तेरे शहरियों को देखूंगा  उनके संग खेलूंगा फ़िक्र मत करो  मेरी अग्नि पावस से तेरे बच्चे झुलसेगें नहीं  मै शाम को भी साथ लाऊंगा  ठंडी शीतलता बसाऊंगा  बस एक स्पर्श मुझे इनका करा दो  दर्पण से इनमे मुझे ईश्वर को देखना है  है भारत मुझे भी यहां का शहरी बना ले  गगन में थकान है में अब गर्मी पहुंचाते थक चूका हूँ  अब तेरे साये में रहना चाहता हूँ  

जीवन आंकलन

जब से जीवन है मिला  सांसे कभी रूकती कभी चल पड़ती है  इसके चल पड़ने का कोई यकीन नहीं  एक बंधन बढ़ा आगे जिसकी कोई जमीन नहीं  हौसलें कभी मिलते है , कभी हौसले पस्त भी होते है  किन्तु इस बीच बिना जमीन का वह रिश्ता फलता जाता है  सुंदरत उपवन में मानो लालिमा कोई बिखर सी जाती है  जोश दम बल सारे अधूरे है  जबतक ह्रदय में जज्बातों की किरणे नहीं होती  यूही किस्मत किसी किसी की परवान नहीं चढ़ती  आओ इस बरस एक दिप सदर पर जला दें  टूटे  मकानों को सज्जा से मिला दें  फिर न दिप बुझेगा कभी न शहर अँधेरे होंगे  तू ऐ दिल जिसमे राजी वही शामिल होंगे 

उम्र दो पल की है

उम्र दो पल की है   क्या पाना क्या खोना है    जो हो चूका और जो होगा       बस उससे ऑंख मिलाना हे करवट उलाहना जीवन को     बारी बारी करती है         सच तो यह भी है             ये डर डर के आगे बढ़ती है एक कविता मेरी पौष    की झिलमिल सुबह पर       वह राशन रहित बच्चे         खाली पेट ,  बुझे उन चूल्हो पर

शर्मीली निगाहें

शर्मीली निगाहें नखरें हजार दिखाती है चमक जाती हे फिर छुप जाती है।  पलकों के आंगन में नाच रही जैसे मैना  सुरीली राग में घुल मिल जाती है।  पैरों की धूल में धीमी शांत सुबह  लाल बैंगनी किरणों से खेलती   और शाम से जा मिल जाती है . 

धूपांजलि

है बादलों के चंगुल में जगत की जान रे तू सुन ले अब स्वयं ही रखना ध्यान अपना रे किसान से। माटी के मौर्य मुखौटे लिये गली गली में घूम रहे अंजान रे तोड़ मिथक दम का साहस से कर अपना उत्...

तड़प दिल की

ना आँख मिलानी थी ना प्रेम जताना था जब वक़्त न देना था फिर यादें भी न देना था क्यों दूर हो इतने तुम जब दिल में हो सिर्फ तुम क्यों अश्क नहीं रुकते क्यों तुम नहीं समझते क्यों तुम को खबर न होती दिल क्यों तड़पता है तुमको फिक्र न होती क्यों अकेले में अक्सर गिरते हैं अश्क के मोती क्यों मेरी तड़प तुम तक न पहुँच पाती क्यों मेरे याद करने से हिचकियाँ तुम्हें न आती क्यों तुमको मेरी याद अब न सताती तुमसे ओ मेरे जीवन क्यों इतना प्रेम करती नीति

नए भारत की कहानी

नया भारत जग में महान है हर कतरे कतरे में एक इंसान है मिटटी और मेहनत को पिघलाकर करता जीवन का भला आसान है। नया भारत जग में महान है करवट बदलते शिशु को आदत में ढालता देता है खिड़की ...

काम की बातें

भारत का नाम सदैव उसकी विविध संस्क्रति के नाम से विश्व में ख्यात है । लोग यहां कभी अमरनाथ दर्शन को विलायत से आते है , कभी अजमेर में ख्वाजा मुईनुद्दीन की जियारत के लिए आते है । भ...

भावुक मन

जाने ये मन भावुक क्यों हो रहा है ? तुझसे दूर मगर तेरा हो गया है। कैसी ये बेकरारी है ? कैसी ये तड़प है ? मन की सारी बात तुम तक पहुँचानी है। तुमसे चाहे मिलना जुदाई का डर भी है।  रुत ये बदल रही है। इंतजार में अँखियाँ तरस रही हैं। आ जाओ मेरे जानम घड़ियाँ गुजर रही हैं। रुका हुआ है लम्हा धड़कन भी थम गई है। बातों से मन मेरा भावुक हो गया है। नीति

बारिश का मौसम

बारिश का मौसम बड़ा सुहाना है सम्पर्क हवा के झोके में दिल दीवाना है। पत्तों पत्तों में ताजगी बूंदों ने भर दी है लुकाछुपी बरसात ने जन जीवन को तर दी है। अश्कों पर पानी डाल दिया न...

कुछ लम्हे हसीन है

कुछ लम्हे जो हसीन है मेरे ख्वाबों के शानदार दिन है मिले शहर तोहफे में तो बसाऊंगा कहाँ अब वो राह में रात गुजारी सी उम्र कमनसीन है खिड़कियां बंद बाढ़ सी क्या आ गई दरवाजे पर कोई म...

हमारी संस्कृति

नमस्ते साथियों , भारत केवल एक जमीन के टुकड़े का नाम भर नही है। और न ही यह विश्व के और कोई देशों की तरह एक साम्राज्य है । अपितु भारत एक राष्ट्रपुरुष है , जो विश्व में कहीं नही पाया ...

सियासत

खाली सियासत को परवाह न इंसान की है झगड़े दो भाई करें उसे मगर फ़िक्र धनो के खदान की है। चंगी भली गृहस्थी कब कैसे है उजड़ जाएँ उसको तो इनकी लाशों से अपना व्यापार हो जाएं। साम दाम दंड के अकाली घात में लगे बैठते है जब क्षति मान अथवा जान की हो तो इंसाफ देने के लिए ऐंठते है। हमे शक इनके भी इंसान होने पर क्या खूब होता है मात की चीखों में भी अंदर अंदर हर्ष इन्हें होता है।

तुम मेरा इन्तेजार हो

तुम मेरा इन्तेजार हो मेरे दिल के आर - पार हो ऐ मेरी जिंदगी के मालिक हर जगह हंसता हुआ गुलजार हो गीत जबान पर रखते हुए और आँखों में खूब चमकना तेरा मुश्किल घड़ी है और साथ आना तेरा ऐ मेरी जिंदगी के मालिक तुम मेरा इन्तेजार हो। लब से बह निकले आंसुओं को दामन से झाड़ना तेरा पलको को मिल गया है क्या आशियाना तेरा ऐ मेरी जिंदगी के मालिक तुम मेरा इन्तेजार हो।