गमों को पी जाओ , देश बचाओं

ऐ मेरे शहरियों गमो को भूल जाओ
आग खाओं मगर जलाओ मत
दीपक भी जलता है मगर
जल जलकर उजाला जीवन का दिखलाता है
इधर उधर के भटकों को
भाव भंगिमा याद् दिलाता है

थोडा प्रेम भाव से इन्हें रहने दो
कोई जीवन हमेशा का नही
जो आया है वह जायेगा
तन से कुछ नही जो है ले जायेगा

आओ गली मुहल्लों घाटों पर
परचम पताका मानवता का लहराएँ
हर एक दहशत को मिलकर देश दुनियां से भगाएं।

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