रवि की आतुरता

प्यारा हिन्दुस्तान हमारा है
काले काले टीले ही सही 
मगर वासियों का सहारा है 

बादलों में छूप गए बुलबुले 
नींद में जमीन खोई हुई 
हवाओं में साफ़ खुशबु 
इत्र है मानो ओढ़ी हुई 

चाल जरा सूरज चल जाता है 
लेकिन नाम भारत सुनकर फिर भी मचल जाता है 

लाओ मै अँधेरे को रौशनी कर देता हूँ 
मगर एक शर्त है आज गलियों में बैठकर 
तेरे शहरियों को देखूंगा 
उनके संग खेलूंगा फ़िक्र मत करो 
मेरी अग्नि पावस से तेरे बच्चे झुलसेगें नहीं 
मै शाम को भी साथ लाऊंगा 
ठंडी शीतलता बसाऊंगा 

बस एक स्पर्श मुझे इनका करा दो 
दर्पण से इनमे मुझे ईश्वर को देखना है 

है भारत मुझे भी यहां का शहरी बना ले 
गगन में थकान है में अब गर्मी पहुंचाते थक चूका हूँ 
अब तेरे साये में रहना चाहता हूँ  

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