हमारी संस्कृति

नमस्ते साथियों ,

भारत केवल एक जमीन के टुकड़े का नाम भर नही है। और न ही यह विश्व के और कोई देशों की तरह एक साम्राज्य है । अपितु भारत एक राष्ट्रपुरुष है , जो विश्व में कहीं नही पाया जायेगा । क्या विशेषता है इसकी की यह एक आल्हा की भाँति सजीव बनकर राष्ट्रपुरुष कहलाता है । मैने यहां भारत को राष्ट्रपुरुष इसलिये कहा क्योकि हमारे भारत गणराज्य के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत के लिए राष्ट्रपुरुष शब्द को अपनी कविताओ में जगह दी है अतः मेरा भारत को राष्ट्रपुरुष कहना सार्थक है।

चूकिं विभिन्न संस्कृतियों के मध्य पलते भारत की विभिन्न विशेषतायें है दुनियाभर का समस्त इतिहास भारत की देन है । यहां की कंचन सी धरा पर भगवन राम हुए , कृष्ण कन्हैय्या की जन्मस्थली रही तथा हनुमान सा भक्त भारत की विशेषताओं में चार चाँद लगाता है।

हमारे देश और इस देश के संविधान जिसने समानता के अधिकारों से मानव जीवन को सुसज्जित किया , न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिये न्यायपालिकाएं दी आदि आदि ।

सभी लोग भारत में मिलकर भाईचारगी से जीवन व्यतीत करते है , हमे इस श्रांत धरा पर गर्व है ।
लोगों के हंसते चेहरे अपनी भाँति भाँति प्रकार की रस्मे भारत को विश्व के पटल से अलग करती है।

अंत में भारत ही सर्व जगत का अध्यक्ष , मानवता का प्रहरी है । जय हिन्द ।

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