जगी उम्मीद है
जगा जी लगाने की दुनिया नही है
फैशन के रास्तों पर जज्बात कहीं नही है।
उसूलों के चैम्पियन पैरों में खड़े है
अंतर तक उनके दग़ा भरे है।
झूठे हो गए जमाने के अलमबरदार
होशियार घात कुठार बगल में लेके हथियार
हमको अपने उपकारों से फुर्सत नही
जीवन गया निकल मगर सियासत है पागल रही
अब किसे और कौन समझाएं
जीवन मिला एक बार क्यों इसे लड़कर मुरझाये
आज का कर लो दीदार
कल का भरोसा नही हो ,न हो आगे प्रसार
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