लव की लगी है
हाँ हाँ जो नज़र तुझे बाहर लगी है
उसके चाहने वाले बहुत है
मीठी मीठी हवाओं में
झपक खुशबु से बहुत है।
जो तार दे जीवन वो बरकत है
जिसके आगे नतमस्तक कुदरत है
मुझे मिली नेमत सी इस जहां में
शदीद मुश्किल की घड़ी में शुकून सी रवां
शब्ज बागों में खेलती आशिक सी
दीवानों के बाजार में रसिक सी।
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