पीड़ा
हालात बड़े सयाने हो गए
गली मुहल्लों में लोग बड़े दीवाने हो गए
गरीब को मारकर हंसता है जमाना
अब तक क्या किया केवल औरों का दिल दुखाना?
हूंक सुनों उन अधमरें जवानों की
जो रोज लड़ते शत्रुओं से बिना चिंता किये जानों की
फुर्सत रहे तो जरा इंसानियत को पढ़ लेना
मस्त जवानी में प्यार फिर सबसे कर लेना
जो हो चूका अब उसे भूल जाना है
नई इबारत के रस्ते पर जीवन चलाना है
धुलती जमीन कण कण जब गम में रोता है
बेटा गगन कड़ककर कहता है
न मै आज धरती के लोगों पर तरस खाऊंगा
न मै कल तरस खाने से कतराऊंगा
तेरे सीने पर जो दाग दर्द के दानवों में दिए है
मै कोटि कोटि सबको तेरे चरणों में ले आऊंगा।
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