तड़प दिल की

ना आँख मिलानी थी
ना प्रेम जताना था
जब वक़्त न देना था
फिर यादें भी न देना था
क्यों दूर हो इतने तुम
जब दिल में हो सिर्फ तुम
क्यों अश्क नहीं रुकते
क्यों तुम नहीं समझते
क्यों तुम को खबर न होती
दिल क्यों तड़पता है तुमको फिक्र न होती
क्यों अकेले में अक्सर गिरते हैं अश्क के मोती
क्यों मेरी तड़प तुम तक न पहुँच पाती
क्यों मेरे याद करने से हिचकियाँ तुम्हें न आती
क्यों तुमको मेरी याद अब न सताती
तुमसे ओ मेरे जीवन क्यों इतना प्रेम करती

नीति

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