भारत माँ

निर्धन जनता बिलख रही है,
मानवता रो रही है।
प्रजातंत्र का हाल बुरा है,
हर नेता भ्रष्टाचारी है।

चारों तरफ लाचारी फैली है,
कितने आप सुरक्षित हैं।
हर तरफ होता बिखराव है,
जाति धर्म में बिखर रहे हैं।

कुर्सी को नेता लड़ते हैं,
जनता मोहरा बनती है।
ऐसा बुरा हाल देश का है,
देख भारत माँ रोती हैं।

नीति


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