रक्त रंजिर धरा

रक्त रंजित धरा,
देख हृदय है डरा।

छिन्न-भिन्न हुई मानवता,
रो रही हैं भारत माता।

दया हृदय से मिटी,
बच्ची पर भी आँख उठी।

तोड़ सब अब खामोशी,
खत्म कर दो बेबसी।

खेल मत रक्त की होली,
कर न माँ को अपनी मैली।

पकड़कर मानवता का हाथ,
चलना है हमें साथ-साथ।

मिटाना है अत्याचार,
दूर करना है अँधकार।

नीति

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