अल्फाज़
अल्फाज़ मेरे खामोशी से तुमसे कुछ कहते हैं।
खुशी में मेरे अल्फाज़ शब्दों का रूप लेते हैं।
दर्द और नाराज़गी में खामोशी बोलती है।
भीगी हुई पलकें फिर अल्फाज़ मेरे कहती हैं।
क्या कहूँ कैसे कहूँ हाल ए दिल चुप ही रहते हैं।
नीति
खुशी में मेरे अल्फाज़ शब्दों का रूप लेते हैं।
दर्द और नाराज़गी में खामोशी बोलती है।
भीगी हुई पलकें फिर अल्फाज़ मेरे कहती हैं।
क्या कहूँ कैसे कहूँ हाल ए दिल चुप ही रहते हैं।
नीति
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