Posts

कली

एक आँगन के गुलशन में, उस घर के माली (मालिक) ने, चाहत के बीज लगाए, उस घर की फुलवारी में। बढ़ा पौधा चाहत का, कली हुई एक प्यारी, महका चमन खुश था माली, बहकी बहकी डाली। हर लम्हा करता रखवाली, बढ़ती कली फैली खुशहाली। कली खिली और फूल बनी, घर आँगन फिर छोड़ चली। जिस गुलशन में कली खिली, जिस माली ने सींची डाली। उस आँगन को छोड़ चली, महकाने दूजी फुलवारी। बस इतनी सी है कहानी, है वो किसी की निशानी। पर जीना है जिंदगानी, दुनिया की है रस्म निभानी। नीति

आँखें

Image
मेरी आँखें हैं आइना मेरे दिल का, देखकर समझ सकते हैं हाल हमारा। नहीं छुप पाता कुछ भी इन आँखों से, आँखों में है हर राज दिल हमारा। किसी से बात करके भर आती हैं आँखें, किसी की याद में बरस पड़ती हैं आँखें। जुबाँ जो ना बोले वो बोल पड़ती हैं आँखें, दर्द दिल में होता है तड़प जाती हैं आँखें। दरिया की रवानी सी बहती हैं आँखें, मतवाली, बेचैन रहती हैं आँखें। राहों में पलकें बिछाए ये आँखें, खामोश लब से बुलाती ये आँखें। हजारों ख्वाव सजाती हैं आँखें, कभी हँसाती कभी रुलाती हैं आँखें। हर दर्द कह देती हैं आँखें, मेरी आँखें हैं आइना मेरे दिल का ।। नीति

हैवानियत

ग़मगीन हृदय है सोचकर ये.. उस मासूम ने क्या महसूस किया होगा जब नन्ही सी बच्ची ने इतनी पीड़ा को सहा होगा रोम रोम उसका चीखा होगा मंदिर का ईश्वर भी उसके साथ रोया होगा ऐसे दानवों को न दुनिया में भेजा होता न देवी जैसी मासूम बच्चियों के संग ऐसा होता न मंदिर का कोना नापाक होता #Ashifa 😢

वक़्त

वक़्त की क्या खूब कहानी है, कभी कटता नहीं कभी रुकता नहीं है। घड़ी मिलन की कुछ पल में चली जाती है, जुदाई का लम्हा खत्म नहीं होता है। वक़्त की दहलीज में वो हमें बाँधते हैं, वो नहीं समझते चाहत की कोई हद नहीं है। हम उन्हें बेपरवाह, बेइंतहा, बेहद चाहते हैं, फिर साथ रहने की वो हद में क्यों बाँधते हैं? आज संग रहने का वक़्त नहीं है, कल होगा वक़्त तो क्या पता कौन कहाँ है? मिले जो ख़ुशियाँ जी भरकर जीना है, क्यों वक़्त के नाम रोना है?? वक़्त हो न हो तू हर लम्हा मुझमें बसता है, तेरे ही नाम से ये दिल मेरा धड़कता है। जब भी तू हमें पुकारता है, सब भूल हम तेरे ही संग संग होते हैं। नीति

इंतजार

Image
दिनकर ने छिपकर की धरा संग आँख मिचौली, ऋतु है मस्तानी बदरा में पंक्षियों की रैली। बिखरी है कुसुम सुगन्ध भ्रमर करता अठखेली, तरु झूमे शीतल समीर से लता खुश होकर झूली। पतझड़ की ऋत...

खामोशी

Image
कभी पढ़ लेना खामोशी से खामोशी को, महसूस करना मेरी धड़कनों को। पा लेना अपना प्रेम देख लेना खुद को, दर्द छिपा होगा तेरे इंतजार का। कहानी मिलेगी मेरे बेपनाह प्रेम की। शिकायतें होंगी रूठने पर ना मनाने की, जिद होगी पास मेरे रहने की। गुजारिश होगी दूर नहीं जाने की, दुआएँ होंगी तेरी खुशियों की, सजदे मिलेंगे इतनी मुहब्बत देने की। नीति

भारत माँ

Image
निर्धन जनता बिलख रही है, मानवता रो रही है। प्रजातंत्र का हाल बुरा है, हर नेता भ्रष्टाचारी है। चारों तरफ लाचारी फैली है, कितने आप सुरक्षित हैं। हर तरफ होता बिखराव है, जाति धर्म में बिखर रहे हैं। कुर्सी को नेता लड़ते हैं, जनता मोहरा बनती है। ऐसा बुरा हाल देश का है, देख भारत माँ रोती हैं। नीति