" तानाशाही "

नमस्ते साथियों,,

जीत और हार के बीच का फर्क महज आत्मविश्वास का होना है . अगर आत्मविश्वास आपके पास है तो कोई शक्ति आपको पराजित नही कर सकती .
मगर शर्त है आपके लक्ष्यों में कही लालसा नही हो,,

बीते दिनों हार जीत की परिभाषा ही बदल गई , लोगों को मारने में कुछ लोगों को आस्था नजर आने लगी है , जीत नजर आने लगी है .

मारने वाले और उनका समर्थन करने वाले सरकार के अंग अन्य देशों का हवाला देकर गरीबों पर सितम करने का समर्थन करते है .

हद तो यहां तक हो गई हत्यारों का स्वागत सरकार के अंग ही अब करने लगे है, और इसमें आश्चर्य इस बात की जनता का एक बड़ा वर्ग इन हिंसाओं क समर्थन भी करता है.

हाँ समर्थन करने वाले कट्टर विचारधारा के है यह सत्य है , क्योकि उनका आदर्श नाथूराम गोडसे है जो गांधीजी का हत्यारा है.

इन सबके इतर एक बात और भी , सरकार की नकामियों को दिखलाने वाला चैनल भी एक समय विशेष पर रोज रोका जाने लगा है . यानि सत्ता इतनी बेबस हो चली है की वह मिडिया की आवाज को भी दबाना चाहती है?

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