शर्मीली निगाहें
शर्मीली निगाहें नखरें हजार दिखाती है
चमक जाती हे फिर छुप जाती है।
पलकों के आंगन में नाच रही जैसे मैना
सुरीली राग में घुल मिल जाती है।
पैरों की धूल में धीमी शांत सुबह
लाल बैंगनी किरणों से खेलती
और शाम से जा मिल जाती है .
लाजबाब नीति 💐💐💐
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