कुछ लम्हे हसीन है
कुछ लम्हे जो हसीन है
मेरे ख्वाबों के शानदार दिन है
मिले शहर तोहफे में तो बसाऊंगा
कहाँ अब वो राह में रात गुजारी सी उम्र कमनसीन है
खिड़कियां बंद बाढ़ सी क्या आ गई
दरवाजे पर कोई मिट्टी लिखा मिटा गई
कुछ पत्ते जो उड़े मिले मुझे लिखे हुए
शामों में दिल के उजाले बसा गई
नीले अम्बर को क्या हुआ अहसास
जमीन को नायाब मिला इतिहास
कई बादशाह मिटे मिटी भी उनकी सल्तनत
मुहब्बत ने मगर न छोड़ी हार की कोई छाप
कत्ल जहां का हो रहा मालों दौलत के लिए
कौन किसे समझें इंसानियत के लिए
बात इतनी मगर नही की तू मेरा नही
बल्कि मुझसे बढ़कर तू है खुदा के लिये।
मेरी ख्वाहिशें सीमित
ReplyDeleteआँखों में आसमान
बांहों में कायनात हो
जहाँ मेरे कदम रूके
बस वही मंजिल हो ✍️ #gBm 😊🌷
👌👌
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